Saturday, 29 June 2024

समस्या - "बेटा, मेरी बहुएं मेरा कहना नहीं सुनती । जीन्स पहन के घूमती हैं।

 समस्या - "बेटा, मेरी बहुएं मेरा कहना नहीं सुनती । जीन्स पहन के घूमती हैं। सर पर पल्ला/चुनरी नहीं रखती और मार्किट चली जाती हैं। मार्गदर्शन करो कि कैसे इन्हें वश में करूँ..."


*समाधान* - आंटी जी चरण स्पर्श, पहले एक कहानी सुनते हैं, फिर समस्या का समाधान सुनाते हैं।


"एक अंधे दम्पत्ति को बड़ी परेशानी होती, जब अंधी खाना बनाती तो कुत्ता आकर खा जाता। रोटियां कम पड़ जाती। तब अंधे को एक समझदार व्यक्ति ने आइडिया दिया कि तुम डंडा लेकर दरवाजे पर थोड़ी थोड़ी देर में फटकते रहना, जब तक अंधी रोटी बनाये। अब कुत्ता *तुम्हारे हाथ...


To be co


ntinued..

Friday, 28 June 2024

बेटियां दो कुलो को महकाती है🙏

 *विवाह के बाद पहली बार मायके आयी बेटी का स्वागत सप्ताह भर चला।*

*सप्ताह भर बेटी को जो पसन्द है, वही सब किया गया।वापिस ससुराल जाते समय पिता ने बेटी को एक अति सुगंधित अगरबत्ती का पुडा दिया और कहा की-बेटी, तुम जब ससुराल में पूजा करने जाओगी,तब यह अगरबत्ती जरूर जलाना*

*माँ ने कहा-*

*बिटिया प्रथम बार मायके से ससुराल जा*रही है,तो भला कोई अगरबत्ती* *जैसी चीज देता है?*

*पिता ने झट से जेब मे हाथ डाला और जेब मे जितने भी रुपये थे,वो सब बेटी को दे दिए*

*ससुराल में पहुंचते ही सासु माँ ने बहु के माता-पिता ने बेटी को बिदाई में क्या दिया,यह देखा तो वह अगरबत्ती का पुडा भी दिखा। सासु माँ ने मुंह बना कर बहु को बोला कि-कल पूजा में यह अगरबत्ती लगा लेना*

*सुबह जब बेटी पूजा करने बैठी, अगरबत्ती का पुडा खोला तो उसमे से एक चिट्ठी निकली*

*लिखा था...*

*"बेटा यह अगरबत्ती स्वतः जलती है,मगर संपूर्ण घर को सुगंधित  कर देती है।इतना ही नही, आजू-बाजू के पूरे वातावरण को भी अपनी महक से सुगंधित एवम प्रफुल्लित कर देती है...!!*

*हो सकता है की तुम कभी पति से कुछ समय के लिए रुठ जाओगी या कभी अपने सास-ससुरजी से नाराज हो जाओगी,कभी देवर या ननद से भी रूठोगी, कभी तुम्हे किसी से बाते सुननी भी पड़ जाए, या फिर कभी अडोस-पड़ोसियों के वर्तन पर तुम्हारा दिल खट्टा हो जाये, तब तुम मेरी यह भेंट ध्यान में रखना*

*अगरबत्ती की तरह जलना, जैसे अगरबत्ती स्वयं जलते हुए पूरे घर और सम्पूर्ण परिसर को सुगंधित और प्रफुल्लित कर ऊर्जा से भरती है, ठीक उसी तरह तुम स्वतः सहन करते हुए ससुराल को अपना मायका समझ कर सब को अपने व्यवहार और कर्म से सुगंधित और प्रफुल्लित करना...*

*बेटी चिट्ठी पढ़कर फफक कर रोने लगी,सासू मां लपककर आयी, पति और ससुरजी भी पूजा घर मे पहुंचे जहां बहु रो रही थी।*

*"अरे हाथ को चटका लग गया क्या?, ऐसा पति ने पूछा।*

*"क्या हुआ यह तो बताओ, ससुरजी बोले।*

*सासु माँ आजु बाजु के सामान में कुछ है,क्या यह देखने लगी* 

*तो उन्हें  पिता द्वारा सुंदर अक्षरों में  लिखी हुई  चिठ्ठी नजर आयी, चिट्ठी पढ़ते ही उन्होंने बहु को गले से लगा लिया और चिट्ठी ससुरजी के हाथों में दी।चश्मा ना पहने होने की वजह से चिट्ठी बेटे को देकर पढ़ने के लिए कहा।*

*सारी बात समझते ही संपूर्ण घर स्तब्ध हो गया।*

*"सासु माँ बोली अरे, यह चिठ्ठी फ्रेम करानी है।यह मेरी बहु को मिली हुई सबसे अनमोल भेंट है, पूजा घर के बाजू में में ही इसकी फ्रेम होनी चाहिए,*

*और फिर सदैव वह फ्रेम अपने शब्दों से, सम्पूर्ण घर, और अगल-बगल के वातावरण को अपने अर्थ से महकाती रही, अगरबत्ती का पुडा खत्म होने के बावजूद भी...*

*क्या आप भी ऐसे संस्कार अपनी बेटी को देना चाहेंगे ...*


*मैंने ये पोस्ट कहीं से कापी पेस्ट कर के आपको भेजी है। अगर ठीक लगे तो अपने किसी अजीज को भेजिये ताकि किसी का घर सुगंधित हो सके.*

*सभी माता पिता ओर पूर्वजो को समर्पित* 


🙏बेटियां दो कुलो को महकाती है🙏

Sunday, 16 July 2023

Love jihad




 (1) प्रश्न :- लव जिहाद किसे कहते हैं ?

उत्तर :- जब कोई मुसलमान पुरुष किसी गैर मुसलमान युवती को बहला फुसला कर उसके शील को भंग करके उससे शादी करके उसको ईस्लाम में दीक्षित कर लेता है । इसी को लव जिहाद कहा जाता है।


(2) प्रश्न :- लव जिहाद क्यों किया जाता है ?

उत्तर :- ताकि गैर मुसलमानों का शीघ्रता से ईस्लामीकरण हो। क्योंकिं जैसे किसी भी जाती को समाप्त करना हो तो उनकी स्त्रीयों को दूषित किया जाता है। जिससे कि वो अपने समाज में आत्म सम्मान खो दें और दूसरे समाज में जाने को बाध्य हो सकें। जिससे कि मुसलमान उस लड़की की सम्पत्ति का मालिक बने और उस लड़की के घर वाले सिर उठा कर नहीं जी सकें। लव जिहाद का मुख्य उद्देश्य है गज़्वा ए हिन्द यानी कि भारत का ईस्लामीकरण।


(3) प्रश्न :- लव जिहाद से ईस्लामीकरण कैसे होता है?

उत्तर :- क्योंकि लव जिहाद की शिकार युवती को उसका हिन्दू समाज अपनाने को तैय्यार नहीं होता है । और जिसके कारण उसके पास और कोई मार्ग शेष नहीं रहता तो वह मुसलमानी नर्क में जीने को विवष हो जाती है । तो इसी प्रकार जो उस लड़की के बच्चे होते हैं वो भी मुसलमान ही होते हैं। तो ऐसे मुसलमानों की संख्या वृद्धि होने से राष्ट्र शीघ्रता से ईस्लामीकरण की ओर बढ़ता है।


(4) प्रश्न :- लव जिहाद की शिकार युवतियों की स्थिती कैसी होती है ?

उत्तर :- लव जिहाद की शिकार युवतियों की स्थिती नर्क से बदतर होती है । जैसा कि कई लड़कियों के मुसलमानों के साथ विवाह के बाद वो तलाक दे दी जाती हैं । और बाद में उनकों वैश्यावृत्ति के धंधे में धकेल दिया जाता है। या फिर उनको भारत की यात्रा पर आये अरब के शेखों को बेच दिया जाता है। जो उनको अपने साथ अरब देशों में ले जाते हैं। वहाँ उनको 'नमकीन बेगम' के नाम से सम्बोधित किया जाता है, उन्हें गुलाम बनाकर इनके साथ शोषण किया जाता है। कई बार उनको नेपाल के माध्यम से पाकिस्तान भेजा जाता है, या फिर असम, त्रिपुरा या बंगाल से उनको बांग्लादेश भेजा जाता है (बंगाल की कांग्रेस सांसद रूमी नाथ इसकी ताज़ा उदाहरण है जिसे एक जिहादी ने फेसबुक के ज़रिये शिकार बनाया और बंग्लादेश भेज दिया)। ऐसी कई और उदाहरण हैं।


(5) प्रश्न :- राष्ट्र के ईस्लामीकरण होने से क्या हानी होगी ?

उत्तर :- किसी भी राष्ट्र का ईस्लामीकरण होने से वहाँ कुरान का शरिया कानून लागू होता है, लोकतन्त्र समाप्त हो जाता है और विचारों को रखने की स्वतन्त्रता समाप्त हो जाती है। देश ईस्लाम की अत्यन्त संकुचित और नीच विचारधारा में जकड़ा जाता है । जिसमें स्त्रीयों का शोषण होता है। उनको पुरुषों की खेती समझा जाता है । जहाँ स्त्रीयों का सम्मान नहीं वहाँ पुरुष निर्दयी हो जाते हैं। पुरुषों के निर्दयी होने से समाज में भारी क्षोभ और वासनामय वातावरण होता है । जहाँ सत्ता ईसलाम के हाथ है वो देश एक बूचड़खाना होता है, जिसमें मानवों की कटती हुई लाशें, पशुओं की कटती हुई लाशें दिखाई देती हैं। स्त्रीयों को उनके अधिकारों से वंचित रखा जाता है। मुसलमान पुरुष जब चाहे उसे तीन बार "तलाक तलाक तलाक" कह कर उससे पीछा छुड़ा लेता है। खून के रिश्तों में या सगे रिश्तों में ही शादियाँ होने से नये जन्मे बच्चों का मान्सिक विकास नहीं होता है। और उस ईस्लामी देश में गैर मुसलमानों को अपने अपने धार्मिक कार्य करने की आज़ादी नहीं होती। उनकी स्त्रीयों को बंदूकों या तलवारों की नोक पर उठा लिया जाता है ( जैसा कि पैगम्बर मुहम्मद किया करता था यहूदी या ईसाई औरतों के साथ )। उनके धार्मिक उत्सवों पर हमले किये जाते हैं , ( जैसे कि मुस्लिम बाहुल्य काशमीर में अमरनाथ यात्रियों के साथ होता है ) । स्त्रीयों की आँखें नोच ली जाची हैं। किसी स्त्री के साथ कोई पुरुष जब बलात्कार करता है तो दंड पुरुष को नहीं स्त्री को ही दिया जाता है। स्त्रीयों को ज़मीन में आधा गाड़ कर उन पर संगसार ( पत्थरों की बारिश ) किया जाता है। चारों ओर मस्जिदों से मौलवीयों की मनहूस आज़ानें सुनाई देती हैं, ज़रा ज़रा सी बातों पर मुसलमानी मौहल्लों में लड़ाईयाँ और खून खराबा होता है, सड़कों पर लोगों के रास्ते रोक कर नमाजें पढ़ी जाती हैं। तो ऐसी अनेकों हानियाँ मानव समाज को उठानी पड़ती हैं। जो की देश के ईसलामीकरण का परिणाम है।


(6) प्रश्न :- भारत में लव जिहाद संचालित कैसे होता है ?

उत्तर :- इसको संचालित करने के लिये पाकिस्तान, या अरब देशों से इनको वहाँ के शेखों द्वारा भारी पैसा आता है जो कि तेल के कुओं के मालिक होते हैं। ये पैसा उनको All India Muslim Scholarship Fund के रूप में दिया जाता है। प्रती माह इन मुस्लिम गुंडों को तैयार किया जाता है और हिन्दू लड़कियों को फंसाने के लिये इनको ₹ 8000 से ₹10000 मासिक वेतन दिया जाता है । तो मस्जिदों में किसी मुहल्ले के सभी मुसलमानों की मीटिंग रखी जाती है । जिसमें भाग लेने वाले अमीर से लेकर गरीब तबके के लोग आते हैं, जिसमें रेड़ीवाला, शॉल बेचने वाले कशमीरी पठान, घरों में काम करने वाले, नाई, चमार आदि। इनको हिन्दू या सिक्ख ईलाकों में घूम घूम कर ये पता लगाने को कहा जाता है कि किस घर की लड़की जवान हो गई है। तो शाल/कालीन बेचने वाले कश्मीरी ये नज़र रखते हैं और फिर ये लड़कियों की लिस्ट बनाई जाती है और जिहादी गुंडे जो कि दिखने में हट्टे कट्टे हों उनको तैयार किया जाता है, मोटर साईकलें खरीद कर दी जाती हैं। जिनको मस्जिदों में रखा जाता है । तो ये युवक अपनी कलाईयों पर मौलीयाँ बाँध कर निकल अपने नाम बदल कर हिन्दू नाम रख लेते हैं और इन लड़कियों के पीछे पड़ जाते हैं। और अगर कोई लड़की दो सप्ताह के भीतर नहीं फंसती तो फिर ये उसे छोड़ कर लिस्ट की दूसरी लड़की पर अपने जिहाद को आज़माने के लिये निकल पड़ते हैं। तो ऐसे ही पूरे मोहल्ले में से कोई न कोई लड़की लव जिहाद का शिकार हो ही जाती है।

दूसरा तरीका ये है कि social networking sites जैसे कि faceook आदि पर ये लोग नकली Id या फिर अपनी असली Id से ही हिन्दू लड़कियों को request भेजते हैं। और जैसे कि इनकी training होती है वैसे ही ये लोग इन लड़कियों को फाँसने के लिये तरह तरह के message भेजते हैं। और वे लड़कियाँ इनके मोह जाल कसं फँसकर अपना सब कुछ गंवा देती हैं।


(7) प्रश्न :- क्या इसके सिवा और भी तरीके हैं लव जिहाद करने के या यही हैं ?

उत्तर :- बहुत से हैं सभी के बारे में जान पाना तो बेहद कठिन है पर कुछ और बताते हैं । ये मुस्लिम जिहादी गुंडे स्कूलों कालेजों के चक्कर लगाते रहते हैं । और लड़कियों के पीछे पड़ जाते हैं । या फिर स्कूलों में पढ़ने वाले मुस्लिम युवक अपनी मुस्लिम सहेलीयों की सहायता से उनकी हिन्दू सहेलियों से दोस्ती करते हैं और धीरे धीरे अपनी कारवाईयाँ शुरू कर देते हैं । या फिर कालेजों और स्कूलों के आगे मोबाईल की दुकानें मुसलमानों के द्वारा खोली जाती हैं । जिसमें जब हिन्दू, बौद्ध या जैन आदि लड़कियाँ फोन रिचार्ज करवाने जाती हैं, तो उनके नम्बरों को ये गलत इस्तेमाल करके आगे जिहादीयों को बाँट देते हैं । जिससे कि वे लोग गंदे गंदे अश्लील मैसेज भेजते हैं । पहले तो ये लड़तियाँ उसकी उपेक्षा करती हैं पर लगातार आने वाले मैसेजों को वे ज्यादा समय तक टाल नहीं पातीं । जिससे कि वो कामुक बातों में फँस कर अपना आपा खो देती हैं और अपना सर्वस्व जिहादीयों को सौंप देती हैं । और ये सब यूँ ही नहीं होता है । इन जिहादियों को ये सब करने की training दी जाती है कि किस प्रकार से लड़की कि मानसिक्ता को समझ कर उसे कैसे फाँसना है । तो ऐसे ही छोटे मोटो और भी तरीके हैं, परन्तु मुख्य यही हैं।


(8) प्रश्न :- ये लव जिहाद की कुछ उदाहरणें दीजीये ।

उत्तर :- बड़ी बड़ी उदाहरणें आपके सम्मुख हैं :- Bollywood मायानगरी में मुसलमान अभिनेताओं की केवल हिन्दू पत्नियाँ ही क्यों होती हैं ? शाहरुख खान, आमीर खान, फरदीन खान, सुहैल खान, अरबाज़ खान, सैफ अली खान, साजिद खान आदि कितने ही नाम हैं जिनकी शादियाँ हिन्दू लड़कियों से ही हुई हैं । इनमें से किसी को भी मुसलमान लड़कियाँ क्यों नहीं पसंद आईं ? आमिर खान, और सैफ अली खान की शादी तो एक की बजाये दो दो हिन्दू लड़कियों से हुई । और इन्हीं को आदर्श मान कर हिन्दू लड़कियाँ मुसलमानों के चंगुल में फँस कर अपनी अस्मिता खो देती हैं । एक फिलम आई थी जिसमें अभिषेक बच्चन का नाम आफताब होता है और वो अजय देवगण की बहन का किरदार निभा रही प्राची देसाई से प्रेम करता है । तो अजय देवगण उसे रोकता है तो वो नीच लड़की सैफ और शाहरुख आदि का उदाहरण देती है और उनको अपना आदर्श स्विकार करती है । तो ये देख कर हिन्दू लड़कियों के मनों पर क्या प्रभाव पड़ता है ज़रा सोचिये । तो ऐसे ही इन लड़कियों को परिणाम की पर्वाह नहीं होती और इनको हर जिहादी सलमान या शाहरूख ही दिखता है । और अपना जीवन बर्बाद कर देती हैं।


(9) प्रश्न :- ये सब करके इन मुसलमानों को मिलता क्या है ?

उत्तर :- इनको ये सब करने के लिये मासिक वेतन और भारी ईनाम मिलता है । दूसरा कारण है मज़हबी जुनून क्योंकि ईस्लाम की शिक्षा ही नफरत और कत्ल की बुनियाद पर टिकी है और मस्जिद के मौल्वीयों के द्वारा झूठी मुहम्मदी जन्नत का लालच दिया जाना। वो कहते हैं कि अगर कम से कम एक हिन्दू लड़की से शादी करो और बदले में सातवें आस्मान की जन्नत पाओ । तो चाहे वो जिहाद काफिरों की खेती को समाप्त करने का ही क्यों न हो इनके अरबी अल्लाह ने इनके लिये जन्नत तैय्यार रखी है । जिसमें फिर एक एक मुसलमान 72 पाक साफ औरतों का आनंद लेता है ।

ईस्लाम में वैसे बहुत प्रकार के जिहाद हैं पर सबसे मुख्य दो प्रकार के जिहाद हैं :-

जिहाद ए अकबर ( बड़ा जिहाद )

जिहाद ए असगर ( छोटा जिहाद )

ये लव जिहाद जो है, वो जिहाद ए अकबर का ही एक बड़ा स्वरूप है।


(10) प्रश्न :- ये लव जिहादीयों को हिन्दू लड़की से शादी करने या नापाक करने का क्या ईनाम मिलता है ?

उत्तर :- ये निम्न लिखित ईनाम गैर मुसलमान लड़कियों को फँसाने के लिये घोषित किया है :-सिक्ख लड़की = 9 लाख

पंजाबी हिन्दू लड़की = 8 लाख

हिन्दू ब्राह्मण लड़की = 7 लाख

हिन्दू क्षत्रीय लड़की = 6 लाख

हिन्दू वैश लड़की = 5 लाख

हिन्दू दलित लड़की = 2 लाख

हिन्दू जैन लड़की = 4 लाख

बौद्ध लड़की = 4.2 लाख

ईसाई कैथोलिक लड़की = 3.5 लाख

ईसाई प्रोटैस्टैंट लड़की = 3.2 लाख

शिया मुसलमान लड़की= 4 लाखईनाम इनसे थोड़ा कम या अधिक हो सकता है पर ज्यादा भेद नहीं है।


(11) प्रश्न :- ये लव जिहाद के ईनाम की घोषणा और संचालन कहाँ से होता है ?

उत्तर :- केरल का मालाबार ही इसका मुख्य संचालन स्थान है । परन्तु अब उसकी शाखायें पूरे भारत में फैल गई हैं । क्योंकि केरल में ही लव जिहाद के 5000 से अधिक मामले कोर्ट के सामने आये हैं । तो पूरे भारत में कितने ही ऐसे मामले होंगे?


(12) प्रश्न :- क्या लव जिहाद में केवल हिन्दू लड़कियों को ही लक्ष्य किया जाता है या अन्य को भी ?

उत्तर :- भारत में हिन्दू बहुसंख्यक हैं जिस कारण पहला लक्ष्य हिन्दू लड़कियाँ ही होती हैं। परन्तु इससे अतिरिक्त दूसरे मत ( बौद्ध, जैन, वाल्मिकी, सिक्ख, ईसाई ) की लड़कियाँ भी लक्ष्य की जाती हैं, क्योंकि ईस्लाम की विचारधार बहुत ही कुंठित और संकुचित है जिसमें कि दूसरे मत पंथों के विरुद्ध उग्र घृणा का भाव विद्यमान है, और स्त्रीयों को तो ईस्लाम जानवरों से भी बदतर समझता है।


(13) प्रश्न :- हिन्दू लड़कियाँ लव जिहाद में ही क्यों फंस जाती हैं ? क्या इनमें दिमाग नहीं होता ?

उत्तर :-इसके ये मुख्य कारण हैं :-

(१) हिन्दू घरों में धार्मिक वातावरण नहीं रखता ।

(२) हिन्दू अपने बच्चों को वैिदक मत की श्रेष्ठता और अवैदिक मत की निकृष्टता नहीं बताता ।

(३) अपने इतिहास पुरुषों और स्त्रीयों की जीवनीयों और उनके बलिदानों को नहीं बताता।

(४) हिन्दू युवा अपने वीर योद्धायों से इतर बालिवुड के नायकों को अपना आदर्श मानता है ।

(५) घर में सास बहु के सीरियल चलने से वातावरण और दूषित हो जाता है ।

(६) हिन्दू अपने बच्चे को धर्मनिरपेक्षता का पाठ पढ़ाता है और मुसलमान अपने बच्चे को दूसरों के प्रती नफरत सिखाता है । जिस कारण ये हिन्दू लड़कियाँ मुसलमान लड़कों से घुलने मिलने में झिझकती नहीं ।

(७) फेसबुक पर ज्यादातर हिन्दू लड़कियों की प्रोफाईल देखेंगे तो उन्होंने धार्मिक पेजों की बजाये, love, tv serials, pyar, ishq, bollywood masala, mickel jakson, shahrukh ,salman, hritik आदि के पेज लाईक किये होते हैं । और उनकी friend list में मुसलमान युवकों की संख्या बहुत ही पायी जाती है।


(14) प्रश्न :- इन हिन्दू लड़कियों को कोई लव जिहाद के बारे में समझाता क्यों नहीं ?

उत्तर :- जब आप इनको समझाने लगते हैं तो ये लड़कियाँ नीचे लिखी बातें बोलती हैं :-

-------- आप तो नफरत फैलाते हो !!

-------- क्यूँ मुस्लिम भी तो ईंसान ही होते हैं ?

-------- तो इसमें क्या बुराई है ?

-------- हमको इससे क्या लेना देना ?

-------- हमें सोच बदलनी चाहिये, और इसी जातीवाद को खत्म करके development करनी चाहिये ।

-------- आपकी सोच पिछड़ी हुई है, देखो dude आगे बढ़ो इतनी hate speech मत फैलाओ !!

-------- मुस्लिम बनने में कोई बुराई नहीं है, क्योंकि profet mohammad भी तो god ही थे ।

-------- Hey you अपना काम करो mind your own buisness !!

-------- You know Dr. Abdul kalam भी मुस्लिम हैं ।

-------- U remember जोधा अकबर की great love story.अभ आप स्वयं जान लीजिये इन हिन्दू लड़कियों की मानसिकता कितनी नीच और घिरी हुई । जिस जाति की स्त्रियों को अपने पराये का भेद ही नहीं पता, तो वो लव जिहादियों का शिकार न होंगी तो और क्या होगा?


(15) प्रश्न :- इन हिन्दू लड़कियों को लव जिहाद के बारे में समझाया कैसे जाये ?

उत्तर :- ये कार्य आप अपने ही घर से शुरू करें । जैसा कि पहले भी कहा गया है कि जब भी आप अपने घर में अपनी सगी बहन या फिर रिश्ते की बहनों के सामने बैठे हों तो ये लव जिहाद की चर्चा अवश्य ही छेड़ें । चाहे उनको ये बात अच्छी लगे या न लगे । क्योंकि जब मरीज़ डाक्टर से ईलाज करवाता है तो उसको भी कड़वी दवाई अच्छी नहीं लगती । पर वही दवा उस मरीज के भले के लिये होती है । तो इसी प्रकार ये चर्चा आपकी बहनों के लिये हितकर है । उनके कानों में यह विषय अवश्य ही पहुँचना चाहिये । तो ऐसे में जब भी रेलगाड़ी या बस में बैठे हुए किसी अजनबी से बातचीत शुरू हो ही जाये तो उससे भी जानबूझ कर इस विषय में किसी न किसी बहाने से लव जिहाद की चर्चा छेड़ दें । ताकि वो अपने घर की स्त्रीयों की रक्षा के बारे में सचेत हो जाये। 

दूसरा मार्ग यह है कि मेरे इस लेख को कम facebook पर हिन्दू लड़कियों के message box में डाल दें । क्योंकि मान लो इस काम को एक राष्ट्रवादी एक दिन में कम से कम 100 लड़कियों के inbox में ये लव जिहाद वाली प्रश्नोत्तरी को copy paste करे तो फिर मान लो ऐसे 100 राष्ट्रवादी हों तो एक दिन में कम से कम 100 x 100 = 10000 अलग अलग हिन्दू लड़कियों के message box में भी ये जानकारी पहुँचेगी । तो अगर उसमें से 5000 लड़कियाँ आपको block कर देती हैं । तो बाकी 5000 में से 2500 इस लेख की उपेक्षा करती हैं । तो 2500 उसको पढ़ेंगी और इनमें से मान लो 1500 लड़कियाँ पढ़ कर भी सहमत नहीं होतीं तो बाकी 1000 उससे सहमत होंगी तो, ये 1000 हिन्दू लड़कियाँ ईस्लामी लव जिहाद से सतर्क हो जायेंगी । तो ऐसे ही 1000 प्रती दिन हिन्दू लड़कियाँ सचेत हों तो एक माह में कितनी होंगी ( 30 x 1000 = 30000 ) प्रतीमाह हिन्दू लड़कियाँ लव जिहाद के बारे में सतर्क रहेंगी और मुसलमान गुंडों से सावधान रहेंगी और अपनी सहेलियों को भी सावधान करेंगी । तो ये बहुत ही कारगर तरीका है और फिर इस लेख को अपनी अपनी profile पर डालें और हिन्दू लड़कियों को इसमें tag करें और कृप्या इसको अधिक से अधिक Share करें।


(16) प्रश्न :- क्या कोई और भी तरीका है लव जिहाद को रोकने का ?

उत्तर :- वैसे तो बार बार कहा जा रहा है कि लव जिहाद की जानकारी ही सबसे बड़ी बात है जो कि हिन्दू जनता को नहीं है । जानकारी किसी भी माध्यम से पहुँचायें पर पहुँचायें अवश्य ही, क्योंकि शायद आपकी कोई हिन्दू बहन राक्षसों के चंगुल में फँसने से बच जाये।


(17) प्रश्न :- क्या इस लव जिहाद की कोई एतिहासिक प्रामाणिकता भी रही है ?

उत्तर :- भारत के मध्य काल में मुगल सेनायें जिस भी हिन्दू घर में चाहें घुस जाते थे । और उनकी बेटीयों या औरतों को उठा ले जाते थे और उनका शील भंग करके फिर से छोड़ जाते थे । तो बहुत से बादशाहों ने तो सुन्दर सुन्दर हिन्दू लड़कियों को टके टके के भावों में भी कसूर, लाहौर या काबुल के बाज़ारों में बेचा था। तो इसके उपरान्त मुहम्मद बिन कासिम जो कि पहला यवन आक्रमणकारी था उसने भी यहाँ भारत से 5 लाख हिन्दू औरतों को अरबी बाज़ारों में ले जा कर बेचा था। और अब वर्तमान की बात करें तो पाकिस्तान मुस्लिम बाहुल्य होने से वहाँ हिन्दू, सिक्ख, ईसाई लड़कियों को जबरन बंदूकों की नोक पर उठाया जाता है, जब इनकी लड़कियाँ जवान होती हैं तो वहाँ के पठान और पश्तून इनके पीछे हाथ धो कर पड़ जाते हैं और मौका पाते ही इनका अपहरण कर लेते हैं फिर बलात्कार के बाद इनको मुसलमान बना कर किसी भी अधेड़ उमर के आदमी से या किसी से भी शादी कर दी जाती है । पाकिस्तानी बच्चों की पाठ्य पुस्तकों में हिन्दुओं और गैर मुसलमानों के प्रती नफरत करने की शिक्षा दी जाती है।


(18) प्रश्न :- लव जिहाद का विषय इतना ही महत्वपूर्ण है तो हिन्दू जनता इस ओर ध्यान क्यों नहीं देती ?

उत्तर :- जानकारी के अभाव के कारण, आलस्य के कारण, या थोथी सैक्युलरिज़म के कारण । हिन्दू की शिक्षा ने ही उसे अधकचरा और सैक्युलर बना दिया है । जिससे की कभी कभी समस्या के पता होने के बावजूद भी वो आँख मूंद कर रहता है । किसी हिन्दू की पहचान करनी हो तो उससे बात करना और वो दो ही शब्द बोलना जानता है, "तुझको क्या ?" या "मुझको क्या ?"। इसी सैक्युलरिज़म के कारण ही ये हिन्दू समाज इतना नपुंसक बन गया है । तो इसको ना अपने धर्म रक्षा की चिंता है, न संस्कृति की चिंता, न देश की चिंता, न अपनी संतानों की नैतिक शिक्षा की चिंता, न अपनी जाती रक्षा की चिंता । बस ये हिन्दू यही रट लगाता है :- " तुझे क्या ? मुझे क्या ? हमको क्या ? तुमको क्या ? हमें क्या लेना ? तुम्हें क्या लेना ? मुझे क्या करना ? तुझे क्या करना ? " इत्यादी।


(19) प्रश्न :- अगर हमारी दृष्टि में कोई हिंदू लड़की लव जिहाद में फँस गई है, तो हमें क्या करना चाहिये ?

उत्तर :- अगर तो आप उसे समझा सकते हैं तो समझायें, निसंकोच होकर उसके घर जायें उसके माता पिता से इस बारे में बात चीत करें और उनको लव जिहाद के विषय में विस्तार से बतायें । अगर आप नहीं समझा सकते तो पास ही किसी क्रियाशील संगठन जैसे [ आर्य समाज, स्वयंसेवक संघ, शिव सेना, बजरंग दल ] आदि से सम्पर्क करें और उनको इसकी सूचना दें । अगर आपकी बेटी या बहन इस चक्कर में फँस रही है तो उसे गुस्से या ज़बरदस्ती से न समझायें । क्योंकि ऐसा करने से वो घर छोड़ कर भी भाग सकती है । ऐसी training लव जिहादीयों को मिली होती है कि वो पूरी तरह से इनको सम्मोहित कर लेते हैं कि ये हिन्दू लड़कियाँ घर तक छोड़ने को तैयार हो जाती हैं और भारत में कानून भी यह कहता है कि अगर लड़की बालिग हो तो वो जहाँ चाहे विवाह कर सकती है । तो इसी का लाभ ये मति भ्रष्ट लड़कियाँ उठाती हैं । अपने घरों में धार्मिक वातावरण बनाने के प्रयास करें । ऋषि दयानंद सरस्वति कृत अमर ग्रन्थ सत्यार्थ प्रकाश भी पढ़ायें जिसमें उन्होंने संसार के मुख्य मत पंथों की वैदिक धर्म से तुल्नात्मक समीक्षा की है । अवैदिक मतों का खण्डन किया है उसका प्रचार करें ।


(20) प्रश्न :- क्या लव जिहाद से किसी हिन्दू लड़कियों को बचाया भी गया है या नहीं ?

उत्तर :- हाँ निश्चित ही ऐसा हुआ है । हम महाराष्ट्र का उदाहरण देते हैं । सब जानते हैं कि वहाँ बाल ठाकरे के नेतृत्व में शिव सेना सक्रीय है । और वहाँ के रहने वाले मुसलमानों को दबा रखा है, उनके अल्लाह हो अकबर के जुनून को ठंडा किया हुआ है । वहाँ नासिक के किसी Resturant में एक मुसलमान किसी हिन्दू लड़की के साथ बैठा था इसकी भनक शिव सैनिकों को लगी तो वो वहाँ गये और जमकर उस मुसल्ले की धुनाई कर दी और ऐसे ही महाराष्ट्र में मौलवीयों ने फत्वा निकाला हुआ था कि हिन्दू लड़कियों को छेड़ो और जन्नत पाओ तो शिव सेना ने स्कूलों कालेजों की घेरा बन्दी की हुई है और यदि कोई सिरफिरा मजनू वहाँ घूमता हुआ या घात लगाता हुआ पकड़ा जाता तो उसकी पिटाई करके जन्नत के नज़ारे दिखा दिये जाते हैं । इस आन्दोलन का असर हुआ कि महाराष्ट्र में लव जिहाद की घटनाओं में भारी घिरावट आई । तो इसी कारण ये मुसलमान शिव सैनिकों या संघीयों को भगवा आतंकी कहते हैं । लेकिन उद्धव ठाकरे अब कांग्रेस के साथ चले गये हैं तो उद्धव ठाकरे की शिव सेना तो जिहादियों के साथ गठबंधन कर लिया है लेकिन शिंदे ने शिव सेना को बटवारा कराकर भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन करके महाराष्ट्र में सरकार बना लिया है अब हिन्दुओं  की संस्थाएं इनसे जब लड़ती है तो भगवान आतंकवादी बोलते हैं तो ये लव जिहादी और उनके सहयोगी आका बेचारे कहेंगे भी क्या ? क्योंकि इनके मनसूबों का नाकाम करके इनको आतंकित जो कर रखा है । केरल में संघ ने करीब 171 हिन्दू लड़कियों को बचाया गया है । ऐसे और भी कई मामले हैं । यही कारण है कि ये जिहादी मुसल्ले सनातन धर्म की रक्षा करनेवाले संगठनो को आतंकवादी संगठन बताते हैं । अरे भाई !! सीधी सी बात है, "जिन्होंने ऐसे दहशतगर्दों को आतंकित कर रखा हो वो आतंकवादी नहीं तो और क्या हैं ??"

Wednesday, 9 August 2017

Sister

*।।बहिण।।*
             〰〰?〰〰
        ।। मायेचं साजुक तुप
            आईचं दुसरं रूप।।

       ।।  काळजी रूपी धाक
           प्रेमळ तिची हाक।।

        ।। कधी बचावाची ढाल
      कधी मायेची उबदार शाल।।

      ।। ममतेचं रान ओलांचिंब
   पाण्यातील आपलंच प्रतिबिंब।।

     ।। दुःखाच्या डोहावरील
           आधाराचा सेतू।।

        ।। निरपेक्ष प्रेमामागे
           ना कुठला हेतू।।

        ।।कधी मन धरणारी ,
     तर कधी कान धरणारी.।।

    ।।कधी हक्काने रागवणारी,
तर कधी लाडाने जवळ घेणारी.।।

        ।।बहिणीचा रुसवा जणु,
          खेळ उन-सावलीचा.।।

       ।।भरलेले डोळे पुसाया
      आधार माय- माऊलीचा.।।

    ।।कुठल्याच नात्यात नसेल एवढी
          या नात्यात ओढ आहे.।।

       ।।म्हणूनच बहिणीचं हे नातं
             चिरंतन गोड आहे.।।

    ।।भरलेलं आभाळ रितं कराया
         तिचीच ओंजळ पुढे येई .।।

      ।।जागा जननीची भरुन 
    काढण्या निर्मीली आईनंतर ताई.।।
❄रक्षाबंधनाच्या हार्दिक शुभेच्छा ❄ In Advance

Friday, 4 August 2017

Khara hijada kon

खरा हिजङा कोण...?

      कामानिमीत्त शनिवारी मुंबईला जाण्याचा योग आला..संतोष दादा आणी मी शनिवारी रात्री मुंबईसाठी औरंगाबाद वरुन निघालो..सकाळी सकाळी सहा च्या दरम्यान आम्ही माझा बहीणीच्या सविता ताईच्या घरी पोहचलो होतो.रात्रभर झोप न झाल्यामुळे सकाळी फार झोप येत होती..पण ओम ला आणी पियुष ला पाहताच एका क्षणात झोप उङाली आणी ताजतवान वाटु लागल..ओम आणी पियुष सोबत थोङ्या वेळ मी  खेळलो आणी जेवण वैगेरे करुन सकाळी दहाच्या सुमारास ताईच्या घरुन निघालो..दुपार पर्यन्तं काम आवरुन दादा आणी मी मरिन लाईन्स वर तीन ला पोहचलो..तिथे थोङासा Enjoy करुन औरंगाबादला जाण्यासाठी सायंकाळी सहा ला CST रेल्वे स्टेशनवर आलो..अचानक मुंबई ला याव लागल्यामुळे रेल्वेच Reservation मिळाल नव्हत..जनरल ङब्यात जागा पकङण्यासाठी दादा आणी मी जवळजवळ तीन तास अगोदरच रेल्वे स्टेशन वर येवुन बसलो होतो.देवगिरी एक्सप्रेस रात्री सव्वा नऊ ला होती..साङे आठ ला गाङी प्लेटफाॅर्लमा लागली..दादा आणी मी खिङकी जवळ समोरासमोरच्या सिट पकङुन बसलो..रेल्वेच्या जनरल ङब्यात दरवाज्या जवळ खिङकीत सिंगल सिंगल सिट पकङण म्हणजे एकट्याने किल्ला लढवावा आणी तो जिंकावा अगदी तसच...दादाने आणी मी आमचा किल्ला जिंकुन सिंहासनावर बसल्या सारख ऐटीत सिट वर बसलो होतो..अपेक्षे प्रमाणेच जनरल ङब्यात गर्दी Cst लाच झाली होती..ङब्यात पाय ठेवायला ही जागा उरली नव्हती..ईतक्यात गाङीत एक   ऐन विशीतली मुलगी आली तिच्यासोबत एक एकविस-बावीस वर्षाचा धङ मिश्याही न फुटलेला मुलगा होता..मुलगी खुप सुंदर होती..पण चेहरयावर चिंता स्पष्ट कळत होती.त्यांच्या वागण्याने ते पळुन आलेले प्रेमी युगुल होते अस वाटत होत..कदाचित दुसरया राज्यातुन ते मुंबई ला पळुन आले होते.त्यांची भाषा आणी अंगा वरचा पेहरावा वरन ते तामीळनाङु-कर्नाटका कङचे वाटत होते...ते दोघेही आमच्या सिट जवळ दरवाज्यात उभे राहीले..गाङी सुरु झाली..ङब्यातल्या सर्वच जणांच्या नजरा त्यांच्याकङे विशेषः त्या मुलीकङे  होत्या..गाङी दहा पंधरा मिनीटातच दादर ला आली आणी गाङीत दादर वरन सात आठ तरुणांचा घोळका आमच्या ङब्यात घुसला..शरिरांने भारदस्त असलेल्या त्या मुलांच्या दाढी मिशा वाढलेल्या,केस रंगवलेले,अंगातले फॅशन च्या नावाखाली घातलेले विचित्र कपङे,तोंङात भरलेला गुटखा पाहुन ते झोपङपट्टीचे वाटत होते..ते प्रेमी युगुल एकमेंकाशी काहीतरी बोलत होते भाषा समजत नव्हती पण पैशांवरन त्यांचा वाद चालु होता..पैसे संपले होते कदाचित त्यांचे..त्या मुलाने रागारागात तिला शिवी दिली आणी एक जोरात कानाखाली लगावली..त्या मुलीला अक्षरः रङुच कोसळल..ति त्याला काहीच न बोलता चुपचाप बसली पण तिच्या ङोळ्यातल पाणी सर्वकाही सांगुन जात होत..गाङी दादर स्टेशन वरन निघाली.त्या मुलालाही त्याची चुक कळाली आणी त्यालाही रङु आल..तिचा हातात हात घेऊन ङोळयातले पाणी लपवत तिची समजुत तो काढु लागला..ते बोलण्यात गुंग झाले पण त्या दादर वरन चढलेल्या मुलांच्या घोळक्याची नजर त्या मुलीवर पङली..तिला रङताना पाहुन ते अश्शील विनोद करु लागले..मोठमोठ्याने घाणेरङ बोलुन हसु लागले..
ङब्यातल्या सर्व माणसांची वासनांध नजर त्या मुलीवर अगोदरच होती..त्या मुलीच्या ते केव्हाच लक्षात आल होत..त्या मुलालाही ते कळाल..मुलांच्या घोळक्यातले मुल किळसवाण्या घाणेरङ्या नजरेने त्या मुलीच्या छाती कङे एकटक पाहत होते..शरिराने नसला तरी ङोळ्यांनी ते तिच्यावर एक प्रकारे बलात्कारच करत होते...आधीच परेशानीत असलेल्या त्या प्रेमी युगुलाला अजुन त्रास देण्याचा प्रयत्न हे सर्वजण करत होते..ति बिचारी मुलगी स्वताची छाती झाकण्याचा इज्जतीला सांभाळण्याचा अटोकाट प्रयत्न करत होती..एव्हाना ठाणे आलच होत..ठाण्यात अजुन गर्दी वाढली आणी तो मुलांचा घोळका मुलीला खेटुन मुद्दाम उभा राहीला....गर्दीचा फायदा घेत त्या घोळक्यातला एक मुलगा तिला नको तिथे स्पर्श करु लागला..ती मुलगी स्वताच अंग चोरत बाजुला होत होती..मला ही ते लक्षात आलच होत..मी दादाला खुणावल आणी सांगितल ते पोर तिला छेङताय दादा..पण दादा ही काहीच न करता मला बोला तु चुपचाप बस,तुला काही देण घेण नाही..दादाच बोलण ऐकताच मन सुन्न पङल..मी दादाला बोलो "दादा तिच्या जागी आपली बहीण असती तर...?"
दादाने हिम्मत करुन त्या मुलाला सांगितल भाऊ जरा माग उभा रहा,लेङीज उभी आहे,त्यावर तो मुलगा बोला "ओय आयघाल्या तुही बहीण हाय का ती..,मंग शांत रहाय..कामाशी काम ठेव"
दादा त्याला काहीच बोलु शकत नव्हता..कारण घोळक्यातले सर्वच शरिराने भारदस्त आणी पट्टीचे असल्याने भांङणाला आमंत्रण देण्यासारखच..
दादा ने काहीच न बोलता त्या मुलीला दोघांच्या सिट मध्ये असलेल्या मोकळ्या जागेत उभ रहायला सांगितल..ति तिथे उभी राहीली आणी तिच्या बाजुला तिच्या सोबत असणारा मुलगा उभा राहीला..ङब्यात असणारे बाकीचे प्रवासी हा निर्लज्ज प्रकार ङोळ्याने पाहुन त्या मुलांना घाबरुन शांत बसले होते..मला ही आज पहिल्यांदा शरिरयष्ठीने कमकुवत असण्याची लाज वाटत होती..मी एका मुलीच रक्षण ईच्छा असताना सुध्दा करु शकत नव्हतो..महाराजांच्या भुमीत हा किळसवाणा प्रकार मला ङोळयासमोर पहावा लागत होता..रेल्वे अता कसारा घाट जवळ जवळ आली होती..त्या घोळक्यातील मुल तोंङातला गुटखा त्या मुली सोबतच्या असणारया मुलाच्या अंगावर थुकत होते..त्या मुलाच त्याषमुलीच्या पाठी मागे स्पर्श करण चालुच होत..गाङी अता कसारा घाटात पोहचली होती..
कसारयाचे बोगदे सुरु झाले होते..अंधाराचा फायदा घेत घोळक्यातला मुलगा त्या मुलीच्या छाती वरण हात फिरवत होता..गाङी बोगद्यात गेल्यावर गाङीत अंधार होयचा अधीच पाऊस आणी वरन कालच झालेली अमावस्या ह्यामुळे आजची रात्र फारच अंधारी वाटत होती..अंधाराचा फायदा घेत तो मुलगा तिच्या पाठीमागे उभा राहुन तिला मिठी मारण्याचा तिची छाती दाबण्याचा घाणेरङा प्रकार करु लागला..आणी त्याचे मित्र हसुन अजुन त्याला प्रोत्साहन देत होते..तिच्यासोबतचा मुलगा त्याला हात पाय जोङुन मागे उभा राहीला सांगत होता पण तो ते ऐकुन न ऐकल्यासारख करत होता..दादा लाही ते पाहुन कस तरी होत होत पण गर्दी मुळे तो काहीच करु शकत नव्हता..ती मुलगी नाईलाजाने सर्व सहन करत उभी होती..मी तीच्यासोबत असलेल्या मुलाला आर.पी.एफ वाल्यांना बोलवायला सांगितल..पण तो बोला.."भया हमने टिकट नही निकाला..वो हम को ही तकलीफ देगा..पहलेही पैसा नही है" अस बोलुन तो ही नाईलाजाने तिच रक्षण करण्याचा प्रयत्न करत होता..ङब्यातल कोणीच त्याच्या मदतीला येत नव्हत..त्या पोरांचा घोळका तिची अता व्हीङीओ शुटींग करत होता..ते पाहुन त्या बैलाला अता चांगलच स्फुरण चढला होता त्याने हद्द पार करत काही वेगळाच करण्याचा प्रयत्न करु लागला..
ती मुलगी जोरात ओरङली आणी रङुच लागली..माझ मन ही तिच्या सोबत रङु लागल..
गाङी ईगतपुरी ला पोहचली..आणी गाङीत तृतीयपंथी ज्याला साधारण भाषेत हिजङा,किन्नर म्हणतो तो पैसे मागण्याकरता आला..ऐरवी हिजङा म्हणल की प्रवाश्यांना पैसे मागुन लुटणारा,नाही दिले तर शिव्या देऊन टाळ्या वाजवणारा अशी माझी समजुत..हिजङ्यांच नाव ऐकल्यावर नाक मुरङणारे,किळसवाण्या नजरेने पाहणारे भरपुर प्रवासी मीही पाहीलेत..मी ही तसच करायचो..मला फार भिती वाटायंची त्यांची..
ईगतपुरीत ङब्यात आलेला हिजङा सर्वांना पैसे मागत मागत आमचा सिट पर्यंन्त आला..त्या हिजङ्याने त्या मुलीला रङताना पाहील..आणी तिला रङण्याच कारण विचारु लागला..हुंदके देत देत ती मुलगी तोङक्या मोङक्या हिंदीत त्या हिजङ्याला सर्व सांगु लागली..तिच्यासोबत असणारया मुलांने घङलेली सर्व हकिकत त्या हिजङ्याला सांगितली...त्या हिजङयाने एका मिनीटाचाही उशीर न करता कोण होता तो मुलगा त्या मुलीला विचारल...तिने बोट दाखवताच त्या हिजङ्याने त्या मुलाच्या थोबाङीत टेकवली...त्याचा हात पिरगळुन त्या पोराला तो हिजङा  मारु लागला...घोळक्यातल्या पोरांची हिजङयाच ते रुप पाहुन चांगलीच फाटली होती..ङब्यातले माणस अता त्या हिजङ्याला त्या पोराना मारतानाचा व्हिङीओ घेऊ लागले..पण अजुनही मदतीला कोणी येत नव्हत..अता नाशिक आलच होत..नाशिक ला येताच त्या मुलांच्या घोळक्याला हिजङ्याने खाली उतरावुन दिल...त्या मुलीने आणी तिच्यासोबतच्या मुलाने त्या हिजङयाचे आभार मानले...मुलगी अक्षरः त्या हिजङ्याच्या गळ्यात पङुन रङु लागली..हिजङयाने ही त्यांची विचारपुस केली..पैसे संपले होते म्हणुन त्या हिजङयाने त्यांना मदत म्हणुन पैसे देऊ केले..त्याने त्या हिजङ्याने प्रेमी युगुलाला चहा पाजुन धिर दिला..आणी ङब्यातुन उतरुन पुढच्या ङब्यात चालल्या गेला..पुढचा ङब्यात तो परत पैसे मागु लागला...
मनात सहज विचार आला..एक हिजङयांने त्या मुलांना थांबवल होत मी तर पुरूष होतो..दादा,ङब्यातले प्रवासी ही पण भरपुर पुरुष होते...पण कोणीच पुरुषार्थ दाखवु शकल नव्हत..बाईच्या शरिरावर पुरुषार्थ दाखवणारे पुरुष समाजात आपला पुरुषार्थ का दाखवत नाही..का मुलींना संकटात मदत करत नाही...हा प्रश्न मनात घर करुन गेला..
हिजङ्यांचा तिरस्कार करणारा मी मात्र..त्या हिजङ्यांचा अभिमान बाळगु लागलो होतो..
माझा नजरेत मुलींची ईज्जतीवर हात टाकणारा तो मुलगा पुरुष हिजङा झाला होता आणी मुलीची ईज्जत वाचवणारा तो हिजङ्याचा पुरुषार्थ मनाला भावला होता..
माणुस जे करु शकला नव्हता ते हिजङा म्हणजेच अर्धनारीनटेश्वर करुन गेला होता..
उगाच नाही देवानेही अर्धनारीनटेश्वराच रुप घेतल होत...

Khara hijada kon

खरा हिजङा कोण...?

      कामानिमीत्त शनिवारी मुंबईला जाण्याचा योग आला..संतोष दादा आणी मी शनिवारी रात्री मुंबईसाठी औरंगाबाद वरुन निघालो..सकाळी सकाळी सहा च्या दरम्यान आम्ही माझा बहीणीच्या सविता ताईच्या घरी पोहचलो होतो.रात्रभर झोप न झाल्यामुळे सकाळी फार झोप येत होती..पण ओम ला आणी पियुष ला पाहताच एका क्षणात झोप उङाली आणी ताजतवान वाटु लागल..ओम आणी पियुष सोबत थोङ्या वेळ मी  खेळलो आणी जेवण वैगेरे करुन सकाळी दहाच्या सुमारास ताईच्या घरुन निघालो..दुपार पर्यन्तं काम आवरुन दादा आणी मी मरिन लाईन्स वर तीन ला पोहचलो..तिथे थोङासा Enjoy करुन औरंगाबादला जाण्यासाठी सायंकाळी सहा ला CST रेल्वे स्टेशनवर आलो..अचानक मुंबई ला याव लागल्यामुळे रेल्वेच Reservation मिळाल नव्हत..जनरल ङब्यात जागा पकङण्यासाठी दादा आणी मी जवळजवळ तीन तास अगोदरच रेल्वे स्टेशन वर येवुन बसलो होतो.देवगिरी एक्सप्रेस रात्री सव्वा नऊ ला होती..साङे आठ ला गाङी प्लेटफाॅर्लमा लागली..दादा आणी मी खिङकी जवळ समोरासमोरच्या सिट पकङुन बसलो..रेल्वेच्या जनरल ङब्यात दरवाज्या जवळ खिङकीत सिंगल सिंगल सिट पकङण म्हणजे एकट्याने किल्ला लढवावा आणी तो जिंकावा अगदी तसच...दादाने आणी मी आमचा किल्ला जिंकुन सिंहासनावर बसल्या सारख ऐटीत सिट वर बसलो होतो..अपेक्षे प्रमाणेच जनरल ङब्यात गर्दी Cst लाच झाली होती..ङब्यात पाय ठेवायला ही जागा उरली नव्हती..ईतक्यात गाङीत एक   ऐन विशीतली मुलगी आली तिच्यासोबत एक एकविस-बावीस वर्षाचा धङ मिश्याही न फुटलेला मुलगा होता..मुलगी खुप सुंदर होती..पण चेहरयावर चिंता स्पष्ट कळत होती.त्यांच्या वागण्याने ते पळुन आलेले प्रेमी युगुल होते अस वाटत होत..कदाचित दुसरया राज्यातुन ते मुंबई ला पळुन आले होते.त्यांची भाषा आणी अंगा वरचा पेहरावा वरन ते तामीळनाङु-कर्नाटका कङचे वाटत होते...ते दोघेही आमच्या सिट जवळ दरवाज्यात उभे राहीले..गाङी सुरु झाली..ङब्यातल्या सर्वच जणांच्या नजरा त्यांच्याकङे विशेषः त्या मुलीकङे  होत्या..गाङी दहा पंधरा मिनीटातच दादर ला आली आणी गाङीत दादर वरन सात आठ तरुणांचा घोळका आमच्या ङब्यात घुसला..शरिरांने भारदस्त असलेल्या त्या मुलांच्या दाढी मिशा वाढलेल्या,केस रंगवलेले,अंगातले फॅशन च्या नावाखाली घातलेले विचित्र कपङे,तोंङात भरलेला गुटखा पाहुन ते झोपङपट्टीचे वाटत होते..ते प्रेमी युगुल एकमेंकाशी काहीतरी बोलत होते भाषा समजत नव्हती पण पैशांवरन त्यांचा वाद चालु होता..पैसे संपले होते कदाचित त्यांचे..त्या मुलाने रागारागात तिला शिवी दिली आणी एक जोरात कानाखाली लगावली..त्या मुलीला अक्षरः रङुच कोसळल..ति त्याला काहीच न बोलता चुपचाप बसली पण तिच्या ङोळ्यातल पाणी सर्वकाही सांगुन जात होत..गाङी दादर स्टेशन वरन निघाली.त्या मुलालाही त्याची चुक कळाली आणी त्यालाही रङु आल..तिचा हातात हात घेऊन ङोळयातले पाणी लपवत तिची समजुत तो काढु लागला..ते बोलण्यात गुंग झाले पण त्या दादर वरन चढलेल्या मुलांच्या घोळक्याची नजर त्या मुलीवर पङली..तिला रङताना पाहुन ते अश्शील विनोद करु लागले..मोठमोठ्याने घाणेरङ बोलुन हसु लागले..
ङब्यातल्या सर्व माणसांची वासनांध नजर त्या मुलीवर अगोदरच होती..त्या मुलीच्या ते केव्हाच लक्षात आल होत..त्या मुलालाही ते कळाल..मुलांच्या घोळक्यातले मुल किळसवाण्या घाणेरङ्या नजरेने त्या मुलीच्या छाती कङे एकटक पाहत होते..शरिराने नसला तरी ङोळ्यांनी ते तिच्यावर एक प्रकारे बलात्कारच करत होते...आधीच परेशानीत असलेल्या त्या प्रेमी युगुलाला अजुन त्रास देण्याचा प्रयत्न हे सर्वजण करत होते..ति बिचारी मुलगी स्वताची छाती झाकण्याचा इज्जतीला सांभाळण्याचा अटोकाट प्रयत्न करत होती..एव्हाना ठाणे आलच होत..ठाण्यात अजुन गर्दी वाढली आणी तो मुलांचा घोळका मुलीला खेटुन मुद्दाम उभा राहीला....गर्दीचा फायदा घेत त्या घोळक्यातला एक मुलगा तिला नको तिथे स्पर्श करु लागला..ती मुलगी स्वताच अंग चोरत बाजुला होत होती..मला ही ते लक्षात आलच होत..मी दादाला खुणावल आणी सांगितल ते पोर तिला छेङताय दादा..पण दादा ही काहीच न करता मला बोला तु चुपचाप बस,तुला काही देण घेण नाही..दादाच बोलण ऐकताच मन सुन्न पङल..मी दादाला बोलो "दादा तिच्या जागी आपली बहीण असती तर...?"
दादाने हिम्मत करुन त्या मुलाला सांगितल भाऊ जरा माग उभा रहा,लेङीज उभी आहे,त्यावर तो मुलगा बोला "ओय आयघाल्या तुही बहीण हाय का ती..,मंग शांत रहाय..कामाशी काम ठेव"
दादा त्याला काहीच बोलु शकत नव्हता..कारण घोळक्यातले सर्वच शरिराने भारदस्त आणी पट्टीचे असल्याने भांङणाला आमंत्रण देण्यासारखच..
दादा ने काहीच न बोलता त्या मुलीला दोघांच्या सिट मध्ये असलेल्या मोकळ्या जागेत उभ रहायला सांगितल..ति तिथे उभी राहीली आणी तिच्या बाजुला तिच्या सोबत असणारा मुलगा उभा राहीला..ङब्यात असणारे बाकीचे प्रवासी हा निर्लज्ज प्रकार ङोळ्याने पाहुन त्या मुलांना घाबरुन शांत बसले होते..मला ही आज पहिल्यांदा शरिरयष्ठीने कमकुवत असण्याची लाज वाटत होती..मी एका मुलीच रक्षण ईच्छा असताना सुध्दा करु शकत नव्हतो..महाराजांच्या भुमीत हा किळसवाणा प्रकार मला ङोळयासमोर पहावा लागत होता..रेल्वे अता कसारा घाट जवळ जवळ आली होती..त्या घोळक्यातील मुल तोंङातला गुटखा त्या मुली सोबतच्या असणारया मुलाच्या अंगावर थुकत होते..त्या मुलाच त्याषमुलीच्या पाठी मागे स्पर्श करण चालुच होत..गाङी अता कसारा घाटात पोहचली होती..
कसारयाचे बोगदे सुरु झाले होते..अंधाराचा फायदा घेत घोळक्यातला मुलगा त्या मुलीच्या छाती वरण हात फिरवत होता..गाङी बोगद्यात गेल्यावर गाङीत अंधार होयचा अधीच पाऊस आणी वरन कालच झालेली अमावस्या ह्यामुळे आजची रात्र फारच अंधारी वाटत होती..अंधाराचा फायदा घेत तो मुलगा तिच्या पाठीमागे उभा राहुन तिला मिठी मारण्याचा तिची छाती दाबण्याचा घाणेरङा प्रकार करु लागला..आणी त्याचे मित्र हसुन अजुन त्याला प्रोत्साहन देत होते..तिच्यासोबतचा मुलगा त्याला हात पाय जोङुन मागे उभा राहीला सांगत होता पण तो ते ऐकुन न ऐकल्यासारख करत होता..दादा लाही ते पाहुन कस तरी होत होत पण गर्दी मुळे तो काहीच करु शकत नव्हता..ती मुलगी नाईलाजाने सर्व सहन करत उभी होती..मी तीच्यासोबत असलेल्या मुलाला आर.पी.एफ वाल्यांना बोलवायला सांगितल..पण तो बोला.."भया हमने टिकट नही निकाला..वो हम को ही तकलीफ देगा..पहलेही पैसा नही है" अस बोलुन तो ही नाईलाजाने तिच रक्षण करण्याचा प्रयत्न करत होता..ङब्यातल कोणीच त्याच्या मदतीला येत नव्हत..त्या पोरांचा घोळका तिची अता व्हीङीओ शुटींग करत होता..ते पाहुन त्या बैलाला अता चांगलच स्फुरण चढला होता त्याने हद्द पार करत काही वेगळाच करण्याचा प्रयत्न करु लागला..
ती मुलगी जोरात ओरङली आणी रङुच लागली..माझ मन ही तिच्या सोबत रङु लागल..
गाङी ईगतपुरी ला पोहचली..आणी गाङीत तृतीयपंथी ज्याला साधारण भाषेत हिजङा,किन्नर म्हणतो तो पैसे मागण्याकरता आला..ऐरवी हिजङा म्हणल की प्रवाश्यांना पैसे मागुन लुटणारा,नाही दिले तर शिव्या देऊन टाळ्या वाजवणारा अशी माझी समजुत..हिजङ्यांच नाव ऐकल्यावर नाक मुरङणारे,किळसवाण्या नजरेने पाहणारे भरपुर प्रवासी मीही पाहीलेत..मी ही तसच करायचो..मला फार भिती वाटायंची त्यांची..
ईगतपुरीत ङब्यात आलेला हिजङा सर्वांना पैसे मागत मागत आमचा सिट पर्यंन्त आला..त्या हिजङ्याने त्या मुलीला रङताना पाहील..आणी तिला रङण्याच कारण विचारु लागला..हुंदके देत देत ती मुलगी तोङक्या मोङक्या हिंदीत त्या हिजङ्याला सर्व सांगु लागली..तिच्यासोबत असणारया मुलांने घङलेली सर्व हकिकत त्या हिजङ्याला सांगितली...त्या हिजङयाने एका मिनीटाचाही उशीर न करता कोण होता तो मुलगा त्या मुलीला विचारल...तिने बोट दाखवताच त्या हिजङ्याने त्या मुलाच्या थोबाङीत टेकवली...त्याचा हात पिरगळुन त्या पोराला तो हिजङा  मारु लागला...घोळक्यातल्या पोरांची हिजङयाच ते रुप पाहुन चांगलीच फाटली होती..ङब्यातले माणस अता त्या हिजङ्याला त्या पोराना मारतानाचा व्हिङीओ घेऊ लागले..पण अजुनही मदतीला कोणी येत नव्हत..अता नाशिक आलच होत..नाशिक ला येताच त्या मुलांच्या घोळक्याला हिजङ्याने खाली उतरावुन दिल...त्या मुलीने आणी तिच्यासोबतच्या मुलाने त्या हिजङयाचे आभार मानले...मुलगी अक्षरः त्या हिजङ्याच्या गळ्यात पङुन रङु लागली..हिजङयाने ही त्यांची विचारपुस केली..पैसे संपले होते म्हणुन त्या हिजङयाने त्यांना मदत म्हणुन पैसे देऊ केले..त्याने त्या हिजङ्याने प्रेमी युगुलाला चहा पाजुन धिर दिला..आणी ङब्यातुन उतरुन पुढच्या ङब्यात चालल्या गेला..पुढचा ङब्यात तो परत पैसे मागु लागला...
मनात सहज विचार आला..एक हिजङयांने त्या मुलांना थांबवल होत मी तर पुरूष होतो..दादा,ङब्यातले प्रवासी ही पण भरपुर पुरुष होते...पण कोणीच पुरुषार्थ दाखवु शकल नव्हत..बाईच्या शरिरावर पुरुषार्थ दाखवणारे पुरुष समाजात आपला पुरुषार्थ का दाखवत नाही..का मुलींना संकटात मदत करत नाही...हा प्रश्न मनात घर करुन गेला..
हिजङ्यांचा तिरस्कार करणारा मी मात्र..त्या हिजङ्यांचा अभिमान बाळगु लागलो होतो..
माझा नजरेत मुलींची ईज्जतीवर हात टाकणारा तो मुलगा पुरुष हिजङा झाला होता आणी मुलीची ईज्जत वाचवणारा तो हिजङ्याचा पुरुषार्थ मनाला भावला होता..
माणुस जे करु शकला नव्हता ते हिजङा म्हणजेच अर्धनारीनटेश्वर करुन गेला होता..
उगाच नाही देवानेही अर्धनारीनटेश्वराच रुप घेतल होत...